Wednesday, 3 March 2021

मानसिक विचरण

 आडवाणी जी ने जब रथ यात्रा निकाली और सारे देश में एक उन्मादी धार्मिक माहौल जैसा वातावरण बन गया, फिर अक्सर अयोध्या,फैज़ाबाद में लाखो कारसेवको की भीड़ एकत्रित होने लगी और एक राष्ट्रवादी पार्टी पोषित होने लगी,,, 
   मैं सोचता था,,, ये सब समाज का सहज घटनाक्रम है इससे समाज पर कोई खास फर्क पड़ने वाला नही,,, क्योकि ज़िंदगी फिर सामान्य रूप से चलने लगती थी,,, 
  जब देश के कोने,कोने से लाखों कारसेवको को समय,समय पर एकत्रित करने का जतन किया जाता था, तो कुछ समय के लिए देश रुक सा जाता था,,, सारे देश मे एक उन्माद सा वातावण बन जाता था, लेकिन सामान्य सी ज़िंदगी फिर चल पड़ती थी,,, 
   हालांकि मैं सामाजिक संगठनों में सक्रिय रहता था, लेकिन हमारे पास नुकसान को मापने की कोई 
दृस्टि या समझ नही थी,,,
    लेकिन आज जब मैं पीछे मुड़ कर देखता हूं तो समझ आता है कि हमने क्या,क्या खोया है,,,
                             क्रमशः